वीरेन्द्र सहवाग जीवन परिचय | Virendra Sehwag Biography

इस पोस्ट में हम Virendra Sehwag Biography हिंदी में देने वाले है | क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसे हर कोई पसंद करता है तथा भारत देश के हर गावं और शहर के छोटे से छोटे मैदानों यहाँ तक की हर गली मोहल्ले से खेला जाता है और देखा जाये तो यही से बड़े-बड़े क्रिकेटर भी निकलते है | उनमे से एक नाम है वीरेन्द्र सहवाग जिन्हें प्यार से वीरू नाम से भी जाना जाता है | वीरेन्द्र सहवाग एक बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक है जिनका योगदान क्रिकेट के इतिहास से कभी नहीं भुलाया जा सकता | Virendra Sehwag की Biography हिंदी में जानने के लिए इस पोस्ट को आखिर तक देखे |

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वीरेंद्र सहवाग (Virendra Sehwag) का जीवन परिचय, इतिहास व पुरस्कार

वीरेन्द्र सहवाग जन्म और पारिवारिक जानकारी (Virendra Sehwag Birth & Family  Information):

वीरेन्द्र सहवाग का जन्म बीस अक्टूबर उन्नीस सौ अठतर में हरियाणा के एक संपन्न तथा संयुक्त परिवार में हुआ था | इनके पिता का अनाज का व्यापार था तथा माता ग्रहणी थी घर में इनसे बड़ी इनकी दो बहने तथा एक छोटा भाई था व ये तीसरे नंबर के पुत्र थे | बचपन से खेल में दिलचस्पी होने की वजह से बहुत ज्यादा पढाई उन्होंने नही की इसकी प्रारंभिक शिक्षा अरोरा स्कूल, दिल्ही तथा जामिया मिलिया इस्मिलिया कालेज, न्यू दिल्ली से ग्रेजुएशन हुआ हे | इनका विवाह सन दो हज़ार चार में आरती अहलवात से हुई इनके दो बेटे है आर्यवीर तथा वेदांत | इनको शाखाहरी खाना बहुत पसंद है, अपनी इसी पसंद को ध्यान रखते हुए उन्होंने एक रेस्टोरेंट दिल्ली में खोला है |

वीरेन्द्र सहवाग खेलने का तरीका (Playing Style):

यह मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े फेन है तथा उनको फॉलो करते थे उनके खलने के तरीओ को बहुत हद तक अपनाया था | यह राईट हैण्ड से खेल ते थे, शुरआत में इनके तरीके को क्रिकेट खेलने के नियम के अनुसार गलत बताया गया क्युकि यह शॉर्ट्स खेल ते समय आर्म्स का गलत तरीके से उपयोग करते थे | धीरे-धीरे प्रायस कर इतने निपूर्ण हो गए की इनका बैटिंग में कोई तोड़ नही था जिसके लिए इनको सबसे रोमांचक बल्लेबाज भी कहा जाने लगा |

ब्रांड एम्बेसडर (BRAND AMBASSADOR)

यह FILLA  नाम की बहुत बड़ी कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर है. जो कि सभी तरह के अम्बेस्टर बनाया है जिसके लिए 80 मिलियन या एक साल का लगभग से ज्यादा में इनको दिए गए है |

वीरेंदर सहवाग का करियर (Virender Sehwag Career)

 प्रम्भिरिक करीयर :

इनको बचपन से क्रिकेट का शोक था सबसे मजेदार बात यहा थी के जब वह मात्र साथ साल के थे इनका सबसे पहले  खीलोनेके रूप में उनके पिता ने उनको बल्ला लाकर दिया था | एक बार जब वह छोटे थे तब क्रिकेट खेलते हुए उनका दात टूट गया था जिनके वजह से उनके पिता उनके क्रिकेट खेलने के ख़िलाफ़ हो गए थे, पर उनकी रूचि देख कर उनके माता के आग्रह पर उनको फिर से क्रिकेट खेल ने की परमिशन मिली |

इनके करियर के शुरुवाती चरण:

सबसे पहले 1997-1998 में दिल्ली क्रिकेट में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की | 1998 में इनका सिलेक्शन दिलीप ट्राफी के लिए नार्थ जोन क्रिकेट टीम में हुआ तब इनका नाम रनिंग अलिस्ट में पाचवे स्थान पर था | कड़ी मेहनत के बाद अगले साल इनका नाम रनिंग लिस्ट में चोथे स्थान पर गया जिसमे इन्होने टु सेवेंटी फोर का स्कोर किया इसके बाद पंजाब जे खिलाफ साउथ जोन में अगरतला में थ्री ट्वेंटी सेवेन बोल्स में वन सेवेनटी फाइव में रणजी ट्राफी खेला |

वीरेन्द्र सहवाग वन डे इंटरनेशनल करियर (Virender Sehwag ODI Career) :

इसमें इनकी शुरुआत बिलकुल भी अच्छी नही हुई थी, यह 1999 में इनका पहला बड़ा मैच था जो की पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया था | इसमें यह एक रन बना कर आउट हो गए थे जिसमे शोएभ अख्तर ने इन्हें एलबीडबल्यू में रन आउट करा था | इस मैच में इनका बोलिंग का पेर्फोमांस भी बोहोत ख़राब था, जिसमे टीम ओवर में पेथिस रन दिए थे इसी वजह से इन्हें लगभग बीस महीने तक राष्ट्रीय टीम में खलने का मोका नही मिला |

सन 2000 में फिर इनको ज़िम्बाब्वे के खिलाफ खलने का मोका नही दिया गया अलागातर असफलता के बाद 2001 में बोहोत मेहनत की और यह तक दिखा बेंगलोर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच खेल कर 54 गेंद में 58 रन बनाये तथा पहला मैन ऑफ़ दे मैच का पुरस्कार हासिल किया | तब यह राष्ट्र टीम के सदस्य के रूप में चुने गए यहाँ से उनके असली करियर की शुरुआत हुई जिससे उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय खेलो में अपनी भागीदारी दर्ज करी पैर उन्होंने अपनी टीम दिल्ली के लिए खेलना नही छोड़ा |

उन्होंने पुनः 2001 में श्री लंका में अपनी सफलता का परमंच लहराया जब उन्हें ट्री-सीरीज में न्यू ज़ीलैण्ड के खिलाफ मैच के लिए चुना गया था | जिसमे सचिन तेंदुलकर अपनी चोट के कारण नही खेल पाए तब अजरुधिन ने बासठ तथा युवराज ने चौसठ गेंदों तथा उन्होंने आपनी उन्सथर गेंदों से पहली बार शतक बनाई ईएसआई के साथ यहाँ तीसरी ओडीआई में नियमित खिलाड़ी के रूप में चुना गया | जनवरी 2002 में क्रिकेटर सौरभ गांगुली को चोट आने के कारण इनको एक और मोका मिला जिसमे कनौर में इंग्लैंड के खिलाफ चौसठ गेंद में बयासी रन बना कर एक अचची बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया |

इसके अलावा उन्होंने 2003 में क्रिकेट वर्ल्ड कप खेला जिसमे इन्होने दो सौ निन्यानवे रन बनाये जिसका ओसत सत्ताविस रन का था | इसी मैच के दौरान इन्होने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेल कर बयासी रन बनाये परंतु दुर्भाग्यवश इसमें इंडिया हार गए | लगातार एक के बाद एक मैच खेलते हुए उन्होंने 2003 में हेदराबाद में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मैच खेला जीमे सचिन और उनके सझेधारी रही, जीमे एक सौ तीस रन बना कर एक सौ बयास्सी रन की पारी खेली तथा चौथी शतक बनाई |

2004 के ओडीआई में तीन एमओएम अवार्ड जीते जोकि श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ खेले गे थे | इनका सबसे अच्छा प्रर्दशन कोच्ची में रहा जब इन्होने पाकिस्तान के खिलाफ खेला उसमे निन्टी फाइव बोल्स में वन जीरो एट रन बनाकर शानदार जित हासिल की |

2006 में कंधे पैर चोट लगने के कारण पाकिस्तान में ओडीआए में दो साल ठीक से खेल नही पाए जिससे उनका स्कोर बोर्ड उसका ग्राफ निचे चला गया और ओडीआए में काफी ओइचे हो गए जिसकी वजह से उनको डब्लूआई-आईइनडी मैच से हटा दिया गया | यहाँ इनके लिए बड़ा कठिन समय था जिसके चलते 2007 वर्ल्डकप में इनको लेने से इंकार कर दिया तब कप्तान राहुल द्रविड़ ने इन पैर विश्वास दिखाते हुए इनको टीम शामिल किया ओएर सहवाग उसमे नाकामियाब रहे तथा पहले ग्रुप में इनका प्रदर्शन ख़राब रहा पर इसके बाद इन उन्होंने अपनी शानदार वापसी सत्यासी गेंदों में एक सौ चौदह रन बना करी थी | इसी के साथ इंडियन टीम ने वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाये जो कि टूर्नामेंट मर इनकी एक मात्र जीत थी |

इन्होने 2011 में इंदौर में वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेल कर अबतक के सरे रिकॉर्ड तोड़ दिये. इस मैच में सहवाग ने सौ उनपचास गेंदों में दो सौ उन्नीस रन बनाये तथा ओडीआई क्रिकेट में आठ हज़ार रन का रिकॉर्ड पर किया | यहाँ वह इंडियन टीम के लिए मजबूत खिलाडी साबित हुए | इंग्लैंड श्रंखला में दक्षिण अफ्रीका के पहले दोरे में चार अर्धशतक के साथ फोर ट्वेंटी सिक्स रन बनाये | इंग्लैंड दोरे से वापसी के बाद आईसीसी चैंपियन ट्राफी में टू सेवेंटी वन रन बनाये जिसमे इनको दो बार मेंन ऑफ़ थे मैच मिला | यहाँ गांगुली के साथ उनकी सझेधारी रही, जिसमे एक सौ चार गेंदों में एक सौ छब्बीस रन बनाये तथा आठ विकेट से इंग्लैंड के खिलाफ जीत दर्ज कराई | इसके साथ राजकोट में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलकर नो विकेट से जीत दर्ज करायी | सबसे बड़ी बात यह थी कि न्यूज़ीलैंड ओडीआई सीरिज में सात मेंचो में शतक लगाने वाले एक मात्र बल्लेबाज थे |

वीरेन्द्र सहवाग टेस्ट मैच के करियर (Virender Sehwag Test Match Career)

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इनका टेस्ट मैच में पूरी तरह से निपूर्ण होकर उतरे थे, इन मैचो में ये पारी दर पारी खेल कर रनों का रिकर्ड तोड़ने चले गये | इन्होने साल 2001 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला तथा एक सौ पांच रन बनाये | 2002 में एम्ग्लंद और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ होम सीरिज खेली तथा चोरासी रन बनाये, तथा दुसरे मत्व्ह में शतक बनाया | 2003 में फर्स्ट सीरिज खेली जो कि वेस्टइंडीज के खिलाफ थी, जिसमे इन्होने एक सौ सेतालिस रन बना कर एक शतक बनाई जिसके लिए इनको टॉप स्कोर बनाने का ख़िताब मिला | इसी के साथ 2003 में म्फाली में न्यूज़ीलैण्ड के खिलाफ एक सौ तीस रन बनाये |

2004 के प्रारंभ मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ तीन सौ नो रन बना कर पिछले सरे रिकॉर्ड तोड़ दिये (इसमें वीवीएस लक्ष्मण का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो सौ इक्क्यासी रन का रिकॉर्ड था) तथा यह इक्कीसवा टेस्ट मैच था, जिसमे इनकी छटवी शतक थी | इसके बाद लाहौर में अगले टेस्ट मैच में नब्बे रन बना कर मेन ऑफ़ दी मैच का ख़िताब जीता | 2004 में क्रिकेटर सुनील गावस्कर ट्राफी के लियर बेगलोर में खेले, जिसमे एम्पायर बिली बाउडेन ने इन्हें एलबीडबल्यु बता कर डिसमिस कर दिया |

इसके बाद सहवाग ने चेन्नई में एक सौ पचपन रन बनाये, परंतु परन्तु यहाँ बारिश आ जाने के वजह से मैच वही स्थगित हुआ | इसी वर्ष होम सीरीज में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में कानपूर में एक सौ चौसठ रन तथा कोलकाता में आठ्यासी रन बना कर इंडियन टीम को दूसरा स्थान हासिल कराया, जिसके लिए इनको मेन ऑफ द सीरिज का पुरस्कार मिला |

2005 में होम सीरिज के दोरान इन्होने क्रमशः माहोली से एक सौ तिहोत्तर रन, कोलकाता में इक्क्यासी रन, बंगलोर में दो सौ एक रन बनाए,जिसमे इनका ओसत पाच सौ पेतालिस रन का रहा जिसके लिए मेंन ऑफ दी सीरिज का अवार्ड मिला | इन्होने बंगलोर टेस्ट मैच में तीन हज़ार रन का रिकॉर्ड पर कर लिया था. इन्होने पारी में सबसे तेज रन बनाकर आईसीसी टेस्ट टीम ऑफ दी इयर का ख़िताब मिला था जिसके कारण उनका नाम टेस्ट प्लेयर के रूप में चुना गया |

2005 में ही उनको आईसीसी सुपर सीरिज में आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला, जिसमे फर्स्ट इनिंग कर छीओत्यर रन बनाये पर फिर कुछ समय इनका पेर्फोमांस अच्छा  नही रहा | इन्होने श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ चार मैचो में मात्र पचास रन बनाये. कुछ समय बाद अहमदाबाद में इन्होने टीम में वापसी की तथा द्रविड़ के बीमार होने के कारण उस समय इन्हें कप्तान बनाया गया |

2006 में लाहौर पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया, जिसमे टू फिफ्टी फोर रन बनाये तथा सबसे ज्यादा टेस्ट रन बना कर डबल सेंचुरी बनाई | इसके बाद राहुल द्रविड़ के साथ सझेधारी कर पाकिस्तान के खिलाफ चार सौ दस बना कर टेस्ट मैचो के अब तक के सरे रिकॉर्ड तोड़ दिये | 2006 में वेस्टइंडीज में दुसरे टेस्ट मैच के शुरुआती दौर में यह कई बार मैचो में बहुत कम रन पैर आउट हो गये, पर बाद में इन्होने एक सौ नब्बे बाल्स पर एक सौ अस्सी रन बना कर मेन ऑफ द मैच जीता | वेस्टइंडीज दोरे में पहली बार इनको बोलिंग के लिये सही नही थे |

2007 में अच्छा न खेलने की वहज से कुछ खेलो से बहार रखा जिसके बाद यह लगातार मेहनत करते रहे | 2008 में फिर से होम सीरिज में इन्होने वापसी की तथा साउथ अफ्रीका के खिलाफ अच्छा मैच खेला. चिदंबरम स्टेडियम में इन्होने पहले टेस्ट में तीन सौ उन्नीस रन बनाये जिसमे दो सौ अठोतर बाल्स में तीन सौ रन बनाकर टेस्ट मैच में सबसे तेज ट्रिपल शतक बनाने का इतिहास रचा. तीसरे दिन उन्होंने दो सौ सतावन रन बनाये जिसमे कई सालो का रिकार्ड तोडा गया |

FAQ :

Q1. कौन हैं वीरेंद्र सहवाग की पत्नी ? | Who is Virendra Sehwag wife ?
Answer : वीरेंद्र सहवाग ने 2004 में आरती अहलावत से शादी की थी |

Q2. वीरेंद्र सहवाग ने किस उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था ? | At what age did Virendra Sehwag start playing cricket ?
Answer : वीरेंद्र सहवाग जब सिर्फ 7 साल के थे तब से उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था जब उन्हें गिफ्ट में एक बैट दिया गया था तब से क्रिकेट को ले कर उनका लगाव शुरू हुआ जो आगे चल कर उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हुआ |

Q3. वीरेंद्र सहवाग का जन्म कहाँ हुआ था ? | Where did Virender Sehwag born ?
Answer : वीरेंद्र सहवाग का जन्म दिल्ली के पास नजफगढ़ में हुआ था |

निष्कर्ष (Conclusion) :

वीरेन्द्र सहवाग जिन्हें प्यार से वीरू नाम से भी जाना जाता है एक बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक है जिनका योगदान क्रिकेट के इतिहास से कभी भुलाया नहीं जा सकता | वीरेन्द्र सहवाग राईट हैण्ड से खेल ते थे और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर,सौरव गांगुली,महेंद्रसिंह धोनी,राहुल द्रविण,युवराज सिंह और भारतीय टीम के लगभग सभी बड़े खिलाडियों के साथ क्रिकेट खेल चुके है और सभी खिलाडियों के साथ भी उनके काफी अच्अछे सम्बन्ध रहे है |

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